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डिजिटलीकरण से शिक्षा की पहुंच में सुधार

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भारत में शिक्षा प्रणाली में क्रांति लाने के लिए जिम्मेदार विभिन्न कारकों में से सबसे महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी है और पारंपरिक शिक्षण तकनीकों ने अधिक आधुनिक दृष्टिकोणों का मार्ग प्रशस्त किया है। परिणामस्वरूप, शैक्षिक क्षेत्र में स्कूलों और कॉलेजों से उच्च शिक्षा संस्थानों में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। इंटरनेट का व्यापक उपयोग शिक्षा उद्योग को बदलने वाले प्रमुख तत्वों में से एक है। भारत में लगभग 61 प्रतिशत इंटरनेट पहुंच है, 83.4 मिलियन से अधिक इंटरनेट ग्राहक हैं, और दुनिया में सबसे कम डेटा लागत 0.68 अमेरिकी डॉलर प्रति जीबी है।

इसने शिक्षा में डिजिटलीकरण के प्रसार को और बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी उपकरणों और तकनीकों को अपनाने और उपयोग करने के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। इससे शिक्षा की पहुंच में सुधार करने में भी मदद मिली है, ताकि कोई भी छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के अवसर से वंचित न रहे सके। यह शिक्षण उपकरण और शिक्षा देने के तरीके के संदर्भ में शिक्षा के क्षेत्र को बदल रहा है। नतीजतन, भारत में स्कूल और संस्थान इस परिवर्तन को लागू करने के लिए लगन से काम कर रहे हैं। शिक्षा के डिजिटलीकरण के लिए निम्नलिखित कारक जिम्मेदार हैं।

-ऑनलाइन टीचिंग- शिक्षण और सीखने के लिए पारंपरिक दृष्टिकोण अब तकनीकी रूप से उन्नत ऑडियो-विजुअल एड्स, अत्याधुनिक तकनीक और नए युग के शिक्षण उपकरण और तकनीकों के लिए रास्ता बना रहा है।

-ऑनलाइन कक्षाओं के लिए शिक्षण और सीखने के तरीके- पिछले दशक में एडटेक कंपनियों और ई-लर्निंग पोर्टलों द्वारा तेजी से उठाये कदमों ने भारत के ग्रामीण कस्बों और गांवों में शिक्षा के प्रचार-प्रसार में प्रौद्योगिकी की भूमिका स्थापित की है। इसलिए ग्रामीण भारत के लिए उन्नति की कुंजी के रूप में नवीन ऑनलाइन कक्षाओं को प्रमुखता मिल रही है।

-शिक्षकों और छात्रों को जोड़ने में सहायक सॉफ्टवेयर- शिक्षक इन उपकरणों का उपयोग कर कहीं से भी छात्रों से जुड़ सकते हैं, जो पारंपरिक कक्षा से परे शिक्षा को बढ़ावा दे सकते हैं। नए प्रोग्राम में फ़ाइल शेयरिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और चैट फ़ंक्शन शामिल हैं। साथ ही सीखने के योग्य अवसर प्रदान करने के लिए नई कक्षाओं को अनुकूलित करने की क्षमता भी शामिल है।

-हाइब्रिड लर्निंग मॉडल- हाइब्रिड लर्निंग मॉडल ने शिक्षा के लिए डिजिटल क्रांति के अनुकूल होने का रास्ता खोल दिया है। कोविड -19 के बाद, शिक्षकों और छात्रों को ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों चैनलों के माध्यम से शिक्षा देने में सक्षम बनाने के लिए हाइब्रिड लर्निंग आवश्यक हो गई है। आधुनिक तकनीकों में आर्टिफीसियल इंटेलीजेन्स और वर्चुअल रियलिटी शामिल है।

शैक्षिक प्रौद्योगिकियों के माध्यम से पढ़ाई करना अधिक सहयोगी और तेजी से बढ़ रहा है। परिवर्तनकारी तकनीक जैसे कि संवर्धित, वर्चुअल और मिक्स रियलिटी क्लास सीखने के तरीके में सुधार करती है। साथ ही छात्रों के लिए दिलचस्प कक्षाओं का माहौल बनाती है। देश की गवर्नमेंट अथॉरिटी भी अब शिक्षा के डिजिटलीकरण का प्रयास कर रही है, ताकि सभी के लिए उपलब्ध और किफायती हो सके। क्योंकि ई-लर्निंग अब बहुत सामान्य हो गया है।
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