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अंतराष्ट्रीय युवा दिवस का महत्त्व

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Hello world

राष्ट्र के निर्माण और विकास में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। क्योंकि आज के युवा ही कल के नेता और वैज्ञानिक बनेंगे। ऐसे में, युवाओं को अपने आसपास का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक ज्ञान होना बहुत जरूरी है। लेकिन क्या आपको पता है कि इस दिन को पहली बार कब मनाया गया? चलिए जानते हैं अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस का इतिहास और इसका उद्देश्य।

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बता दें कि साल 2020 की संयुक्त राष्ट्र विश्व युवा रिपोर्ट के अनुसार, 1.21 बिलियन यानी वैश्विक जनसंख्या की 15.5 फीसदी आबादी 15 से 24 वर्ष के युवा लोगों की है। ऐसे में, युवाओं के समस्याओं को समझना और उनका समाधान निकालना आवश्यक है, ताकि वह आगे चलकर देश और दुनिया के विकास में मदद कर सकें। इसी उद्देश्य से हर साल 12 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है।

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दरअसल, 17 दिसंबर, 1999 में यूनाइटेड नेशंस ने इसे मनाने का फैसला लिया था और 2000 में इस दिवस की शुरुआत हुई थी। तभी से 12 अगस्त को मौजूदा मामलों में युवाओं की भागीदारी के महत्व को स्वीकार करने और बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन युवा आबादी जिन मुद्दों से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जूझती है, उसे स्वीकारा जाता है। साथ ही, दुनिया में महत्वपूर्ण मामलों में युवाओं की भूमिका को भी स्वीकार किया जाता है, फिर चाहे वह शिक्षा की दुनिया में हो, या सामाजिक न्याय, वैश्विक शांति या जलवायु परिवर्तन। विश्व स्तर पर युवा दिवस मनाने का उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर युवाओं की भागीदारी बढ़ाना है। युवाओं को अपना महत्व बताना, देश के विकास में उन्हें अपना रोल समझाना बहुत जरूरी है। यह दिन उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए ही समर्पित है।

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संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की थीम 'इंटरजेनरेशनल सॉलिडेरिटी: क्रिएटिंग ए वर्ल्ड फॉर ऑल एज' है, जो उम्रवाद का मुकाबला करने और पीढ़ियों के बीच संपर्क बनाने के लिए है। युवाओं के ज्ञान से लेकर बुजुर्गों की ऊर्जा और आदर्शवाद तक, हमें सभी उम्र के लोगों द्वारा लाए गए उपहारों का स्वागत और लाभ उठाना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी पीछे न छूटे।


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