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भारतीय मूल की अंतरिक्षयात्री श्रीषा बांदला की कहानी

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भारतीय मूल की श्रीषा बांदला पिछले साल जुलाई में ब्रिटिश कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक की स्पेसक्राफ्ट यूनिटी-22 के जरिये अंतरिक्ष में उड़ान भरी थीं। जिसके बाद वह अंतरिक्ष में कदम रखने वाली तीसरी भारतीय महिला बन गई।

आँध्रप्रदेश के गुंटूर जिले की 34 वर्षीय श्रीषा बांदला अमेरिका में पली बढ़ीं। भारत में रहने के दौरान तारों को इतना नजदीक से देखकर उनके बीच जाने और उनके बारे में जानने की उत्सुकता हुई। आंखों की कमजोर रोशनी के कारण वो नासा की अंतरिक्षयात्री नहीं बन सकती थीं और उन्होंने इंजीनियरिंग का रास्ता इसके लिए चुना। युवा एयरोस्पेस इंजीनियर रिचर्ड ब्रानसन के साथ उनकी वर्जिन गैलेक्टिक की अंतरिक्ष में पहली उड़ान का हिस्सा थीं। धरती से 90 किलोमीटर की ऊंचाई पर उनकी इस उड़ान ने उन पर गहरा प्रभाव डाला।

श्रीषा ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि "इतनी ऊंचाई से धरती को देखना और वायुमंडल की पतली नीली रेखा को देखना मेरे लिए बेहद अविश्वसनीय क्षण था। मैं इसको लेकर बेहद खुशकिस्मत समझती हूं। मैं अमेरिका के दक्षिण-पश्चिम हिस्से की ओर देख रही थी। हम राज्यों की बात कर रहे थे, लेकिन मुझे कोई सीमा नहीं दिखी। यह दिखाता है कि हम कितने विभाजित हो गए हैं। इस खूबसूरत धरती को काले रंग के आसमान से देखना अकल्पनीय है। लिहाजा धरती पर वापस लौटने को लेकर बेहद ऊर्जावान महसूस कर रही हूं।" मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस यात्रा का अनुभव करें।

बता दें कि अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली श्रीषा बांदला चौथी भारतवंशी और तीसरी भारतीय मूल की महिला हैं। इससे पहले राकेश शर्मा, कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन की यात्रा कर चुके हैं।


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