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G-7 सम्मेलन और इसका उद्देश्य

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Hello world

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय जर्मनी में चल रहे जी-7 शिखर सम्मेलन यानी ग्रुप ऑफ सेवन (G-7 Summit) में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री जिस समिट का हिस्सा बने हैं, वह जी-7 समिट है क्या? यह कब बना और इसका उद्देश्य क्या है?

G-7 एक ऐसा ग्रुप है, जिसमें प्रमुख औद्योगिक देश शामिल हैं। इन्हीं देशों के समूह को जी-7 कहते हैं। जो देश इस संगठन के सदस्य हैं, उनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम हैं। इस समूह के देश ह्यूमन राइट्स, डेमोक्रेसी, फ्रीडम और डेवलपमेंट के सिद्धांत पर काम करते हैं। इस साल G-7 की अध्यक्षता जर्मनी कर रहा है।

G-7 समूह की स्थापना साल 1975 में हुई थी। उसी साल समूह की पहली बैठक में दुनिया भर में बढ़ रहे आर्थिक संकट और उसके समाधान पर चर्चा हुई थी। तब से हर साल यह समूह शिखर सम्मेलन का आयोजन करता है। इस सम्मेलन में सात देशों के नेता मानव हितों से संबंधित वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं और उन मुद्दों का समाधान ढूंढते हैं और कोशिश करते हैं कि उन मुद्दों पर सहमति बने। पहले इस समूह में छह सदस्य देश ही थे लेकिन स्थापना के एक साल बाद 1976 में कनाडा इसमें शामिल हो गया और यह G-7 बन गया।

जी 7 के देशों के अलावा दूसरे देशों के प्रतिनिधियों को भी इस सम्मेलन में हर साल आमंत्रित किया जाता है। इस साल जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ स्कोल्ज़ ने भारत, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, सेनेगल और साउथ अफ्रीका को सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया है।


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