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हम जम्हाई क्यों लेते हैं और क्या यह संक्रामक है?

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हम जम्हाई क्यों लेते हैं और क्या यह संक्रामक है?

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जब हमारा शरीर थक जाता है या हमें नींद आने लगती है, तो हमारे शरीर में एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है, जिसे जम्हाई यानी उबासी लेना कहते हैं। लेकिन हम कई बार देखते है कि किसी सार्वजानिक स्थान पर कोई व्यक्ति जम्हाई लेता है तो उसके आसपास के लोगों को भी जम्हाई आना शुरू हो जाती है।

ऐसा माना जाता है कि जम्हाई 40 करोड़ साल पहले जबड़े वाली मछलियों की उत्पत्ति के साथ ही शुरू हुई थी।

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जम्हाई के संक्रामक होने के पीछे विशेष कारण है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब हम किसी को जम्हाई लेते देखते हैं तो ह्यूमन मिरर न्यूरॉन सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है। यह विशेष तंत्रिकाओं का एक समूह होता है जो हमें दूसरों के व्यवहार को देख उसकी नकल करने के लिए हमें प्रेरित करता है। ऐसा कहा जाता है कि जम्हाई लेने से दिमाग सक्रिय होता है। यह ज्यादातर सामाजिक जीवों में होता है।

जम्हाई लेना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है। यह कई तरह की वजहों से आती है।

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2014 में फिजियोलॉजी एंड बिहेवियर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जब हमारे शरीर का तापमान ज्यादा हो जाता है तब इसे ठंडा करने और तापमान का संतुलन बनाने के लिए जम्हाई आती है। इसके अलावा दिमाग के थक जाने पर, बोरियत होने पर, कार्बन डाईऑक्साइड के बाहर निकलने पर, नींद आने पर, नींद संबंधी बीमारियों, दवाओं के साइड इफेक्ट्स से या फिर डिप्रेशन की वजह से भी जम्हाई आती है। वहीं, मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किसी तरह की चिंता या सोच से गुजरने के बाद भी हम उबासियां लेते है।

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